
पांच साल बाद जब मामला हाईकोर्ट में आया तब पता चला कि एंटी करप्शन ब्यूरो में भ्रष्टाचार की जिस धारा 7 और 13(1) के तहत मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांगी थी वो तो सरकार ने दी हीं नही थी. उसके बदले आईपीसी की धारा 384 और 120 बी के तहत मुकदमा चलाने की इजाजत दी गई थी.
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